Wednesday, January 13, 2016

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माता लक्ष्मीजी के पूजन की सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार होना चाहिए। इसमें लक्ष्मीजी
को कुछ वस्तुएँ विशेष प्रिय हैं। उनका उपयोग करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इनका उपयोग
अवश्य करना चाहिए। वस्त्र में इनका प्रिय वस्त्र लाल-गुलाबी या पीले रंग का रेशमी वस्त्र है।

माताजी को पुष्प में कमल व गुलाब प्रिय है। फल में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े
प्रिय हैं। सुगंध में केवड़ा, गुलाब, चंदन के इत्र का प्रयोग इनकी पूजा में अवश्य करें। अनाज में
चावल तथा मिठाई में घर में बनी शुद्धता पूर्ण केसर की मिठाई या हलवा, शिरा का नैवेद्य
उपयुक्त है।

प्रकाश के लिए गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेल इनको शीघ्र प्रसन्न करता है। अन्य
सामग्री में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न
आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर, भोजपत्र का पूजन में उपयोग करना चाहिए।

*_तैयारी _**__*
चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे।
लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। पूजनकर्ता मूर्तियों के सामने की तरफ बैठें। कलश को
लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल
का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक है।

दो बड़े दीपक रखें। एक में घी भरें व दूसरे में तेल। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें व दूसरा
मूर्तियों के चरणों में। इसके अतिरिक्त एक दीपक गणेशजी के पास रखें।

मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर
एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढेरियां बनाएं। गणेशजी की ओर
चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं। नवग्रह व षोडश मातृका के
बीच स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।

इसके बीच में सुपारी रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी। सबसे ऊपर बीचोंबीच ॐ लिखें।
छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें। थालियों की निम्नानुसार व्यवस्था
करें- 1. ग्यारह दीपक, 2. खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर,
कुंकुम, सुपारी, पान, 3. फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप,
सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।

इन थालियों के सामने यजमान बैठे। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो
तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे।
diwali puja vidhi in hindi
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*_चौकी _**__*
(1) लक्ष्मी, (2) गणेश, (3-4) मिट्टी के दो बड़े दीपक, (5) कलश, जिस पर नारियल रखें,
वरुण (6) नवग्रह, (7) षोडशमातृकाएं, (8) कोई प्रतीक, (9) बहीखाता, (10) कलम और
दवात, (11) नकदी की संदूकची, (12) थालियां, 1, 2, 3, (13) जल का पात्र, (14)
यजमान, (15) पुजारी, (16) परिवार के सदस्य, (17) आगंतुक।

*_पूजा की संक्षिप्त विध_**_ि_*
सबसे पहले पवित्रीकरण करें।

आप हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में
मंत्र पढ़ें। इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन
को भी पवित्र कर लें।

*ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।*
*यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥*
*पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः*
*कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥*

अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को
प्रणाम करके मंत्र बोलें-

*ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।*
*त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥*
*पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः*

अब आचमन करें
पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ केशवाय नमः
और फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ नारायणाय नमः
फिर एक तीसरी बूंद पानी की मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ वासुदेवाय नमः

फिर ॐ हृषिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें और अंगूठे के मूल से होंठों को पोंछकर हाथों को
धो लें। पुनः तिलक लगाने के बाद प्राणायाम व अंग न्यास आदि करें। आचमन करने से विद्या
तत्व, आत्म तत्व और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है तथा तिलक व अंग न्यास से मनुष्य पूजा
के लिए पवित्र हो जाता है।

आचमन आदि के बाद आंखें बंद करके मन को स्थिर कीजिए और तीन बार गहरी सांस लीजिए।
यानी प्राणायाम कीजिए क्योंकि भगवान के साकार रूप का ध्यान करने के लिए यह आवश्यक है
फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा
जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम
किया जाता है। फिर पूजा का संकल्प किया जाता है। संकल्प हर एक पूजा में प्रधान होता है।

*_संकल्प - _**__*आप हाथ में अक्षत लें, पुष्प और जल ले लीजिए। कुछ द्रव्य भी ले लीजिए।
द्रव्य का अर्थ है कुछ धन। ये सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं
अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं जिससे मुझे
शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों। सबसे पहले गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए। उसके बाद वरुण पूजा
यानी कलश पूजन करनी चाहिए।

हाथ में थोड़ा सा जल ले लीजिए और आह्वान व पूजन मंत्र बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए।
फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए।
इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है। हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प ले
लीजिए। सोलह माताओं को नमस्कार कर लीजिए और पूजा सामग्री चढ़ा दीजिए।

सोलह माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन होता है। रक्षाबंधन विधि में मौली लेकर भगवान
गणपति पर चढ़ाइए और फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिए और तिलक लगा लीजिए। अब आनंदचित्त
से निर्भय होकर महालक्ष्मी की पूजा प्रारंभ कीजिए।

दिवाली हिन्दू धर्म का मुख्य पर्व है। रोशनी का पर्व दिवाली कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। दिवाली को दीपावली (Deepawali) के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि दीपों से सजी इस रात में लक्ष्मीजी भ्रमण के लिए निकलती हैं  और अपने भक्तों को खुशियां बांटती हैं।
साल 2016 में दिवाली (Diwali 2016)
इस साल दीपावली या दिवाली 30 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

दीपावली पर्व के पीछे कथा (Story of Deepawali in Hindi)
अपने प्रिय राजा श्री राम के वनवास समाप्त होने की खुशी में अयोध्यावासियों ने कार्तिक अमावस्या की रात्रि में घी के दिए जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से हर वर्ष दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस त्यौहार का वर्णन विष्णु पुराण के साथ-साथ अन्य कई पुराणों में किया गया है।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा (Deepawali Pooja Vidhi Hindi)
अधिकांश घरों में दीपावली के दिन लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा की जाती है। हिन्दू मान्यतानुसार अमावस्या की रात्रि में लक्ष्मी जी धरती पर भ्रमण करती हैं और लोगों को वैभव का आशीष देती है। दीपावली के दिन गणेश जी की पूजा का यूं तो कोई उल्लेख नहीं परंतु उनकी पूजा के बिना हर पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए लक्ष्मी जी के साथ विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की भी पूजा की जाती है।

दीपदान (Deepdan in Hindi)
दीपावली के दिन दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। नारदपुराण के अनुसार इस दिन मंदिर, घर, नदी, बगीचा, वृक्ष, गौशाला तथा बाजार में दीपदान देना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन यदि कोई श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करता है तो, उसके घर में कभी भी दरिद्रता का वास नहीं होता। इस दिन गायों के सींग आदि को रंगकर उन्हें घास और अन्न देकर प्रदक्षिणा की जाती है।

दीपावली पर्व भारतीय सभ्यता की एक अनोखी छठा को पेश करता है। आज अवश्य पटाखों की शोर में माता लक्ष्मी की आरती का शोर कम हो गया है लेकिन इसके पीछे की मूल भावना आज भी बनी हुई है।

मां लक्ष्मी के मंत्र (Goddess Laxmi)
देवी लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है। आज के युग में बिना धन-वैभव मनुष्य का जीवन अधूरा होता है। कलयुग में जिन देवों को सर्वाधिक पूजा जाता है उनमें लक्ष्मी जी एक हैं। देवी लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के कुछ आसान मंत्र निम्न हैं:

लक्ष्मी जी के मंत्र (Laxmi Mata Mantra in Hindi)
मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें रक्तचन्दन समर्पण करना चाहिए-
रक्तचन्दनसम्मिश्रं पारिजातसमुद्भवम् |
मया दत्तं महालक्ष्मि चन्दनं प्रतिगृह्यताम् ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः रक्तचन्दनं समर्पयामि |
Maa Lakshmi ki pooja ke dauran is mantra ke dwara unhe raktchandan samarpan karna chahiye-
Raktchandanasammishram Paarijaatasamudbhavam |
Mayaa Dattam Mahalakshmi Chandanam Pratigrihyataam ||
Om Mahalakshmyai Namah Raktchandanam Samarpayaami |
**********************************************************************************
मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें दुर्वा समर्पण करना चाहिए-
क्षीरसागरसम्भते दूर्वां स्वीकुरू सर्वदा ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः दूर्वां समर्पयामि |
Maa Lakshmi ki pooja ke dauran is mantra ke dwara unhe durva samarpan karna chahiye-
Vishnvaadisarvadevaanaam Priyaam Sarvsushobhanaam |
Ksheersaagarasambhate Doorvaam Sveekuroo Sarvadaa ||
Om Mahalakshmyai Namah Doorvaam Samarpayaami |
**************************************************************************
इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को अक्षत समर्पण करना चाहिए-
अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुंकुमाक्ताः सुशोभिताः |
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरि ||
ॐ महलक्ष्म्यै नमः | अक्षतान समर्पयामि ||
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ko akshat samarpan karna chahiye-
Akshataashch Surshreshth Kunkumaaktaah Sushobhitaah |
Mayaa Niveditaa Bhaktyaa Grihaan Parmeshvari ||
Om Mahalakshmyai Namah | Akshtaan Samarpayaami ||
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इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को पुष्प माला समर्पण करना चाहिए-
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो |
ॐ मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि |
ॐ महालक्ष्म्यै नमः | पुष्पमालां समर्पयामि ||
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ko pushp mala samarpan karna chahiye-
Maalyaadeeni Sugandheeni Maalatyaadeeni Vai Prabho |
Om Manasah Kaamamaakootim Vaachah Satyamasheemahi |
Pashoonaam Roopmannasya Mayi Shrih Shrayataam Yashah ||
Om Mahalakshmyai Namah | Pushpmalaam Samarpayaami |
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इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को आभूषण समर्पण करना चाहिए-
रत्नकंकणवैदूर्यमुक्ताहाअरादिकानि च |
सुप्रसन्नेन मनसा दत्तानि स्वीकुरूष्व भोः || ॐ
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् |
अभूतिमसमृद्धि च सर्वां न
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ko aabhushan samarpan karna chahiye-
Ratnkankanavaidooryamuktaahaaaraadikani Ch |
Suprasannen Manasaa Dattani Sveekurooshva Bhoh ||
Om Kshutpipaasaamalaam Jyeshthaamalakshmeem Naashayaamyaham |
Abhootimasamriddhi Ch Sarvaam Nirgud Me Grihaat ||
Om Mahalakshmyai Namah | Aabhushan Samarpayaami |
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इस मंत्र के द्वारा माता लक्ष्मी को वस्त्र समर्पण करना चाहिए-
दिव्याम्बरं नूतनं हि क्षौमं त्वतिमनोहरम् | दीयमानं मया देवि गृहाण जगदम्बिके ||
ॐ उपैतु मां देवसुखः कीर्तिश्च मणिना सह | प्रादुर्भूतोस्मि राष्ट्रेस्मिन कीर्तिमृद्धि ददातु मे ||<
Is mantra ke dwara Mata Lakshmi ko vastra samarpan karna chahiye-
Divyaambaram Nootanam Hi Kshaumam Tvatimanoharam |
Deeyamaanam Mayaa Devi Grihaan Jagadambike ||
Om Upaitu Maa Devsukhah Keertishcha Maninaa Sah |
Praadurbhootosmi Raashtresmin Keertimriddhi Dadaatu Me ||
Om Mahalakshmyai Namah Vastram Samarpayaami |
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इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को स्नान हेतु घी अर्पित करना चाहिए-
ॐ घृतं घृतपावानः पिबत वसां वसापावानः पिबतान्तरिक्षस्य हविरसि स्वाहा |
दिशः प्रदिश आदिशो विदिश उद्धिशो दिग्भ्यः स्वाहा || ॐ महालक्ष्म्यै नमः घृतस्नानं समर्पयामि |
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ko snaan hetu ghee arpit karna chahiye-
Om Ghritam Ghritapaavaanah Pibat Vasaam Vasaapaavaanah Pibataantarikshasya Havirasi Svaahaa |
Dishah Pradish Aadisho Vidish Uddhisho Digbhyah Svaahaa ||
Om Mahalakshmyai Namah Ghritsnaanam Samarpayaami |
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मां लक्ष्मी की पूजा में इस मंत्र के द्वारा उन्हें जल समर्पण करना चाहिए-
मन्दाकिन्याः समानीतैर्हेमाम्भोरूहवासितैः | स्नानं कुरूष्व देवेशि सलिलैश्च सुगन्धिभिः ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः स्नानं समर्पयामि |
Maa Lakshmi ki pooja me is mantra ke dwara unhen jal samarpan karna chahiye-
Mandaakinyaah Samaaneetairhemaambhoruhavaasitaih |
Snaanam Kurushva Deveshi Salilaishcha Sugandhibhih ||
Om Mahalakshmyai Namah Snaanam Samarpayaami |
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इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को आसन समर्पण करना चाहिए-
तप्तकाश्चनवर्णाभं मुक्तामणिविराजितम् | अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम् ||
ॐ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रमोदिनीम् | श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ||

Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ko aasan samarpan karna chahiye-
Taptkaashchanavanaarbham Muktaamaniviraajitam |
Amalam Kamalam Divyamaasanam Pratigrihyataam ||
Om Ashvapurvaam Rathmadhyaam Hastinaadapramodineem |
Shriyam Deveemupahvaye Shrirmaa Devee Jushataam ||
Om Mahalakshmyai Namah | Aasanam Samarpayaami |
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इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी का आवाहन करना चाहिए-
सर्वलोकस्य जननीं सर्वसौख्यप्रदायिनीम |
सर्वदेवमयीमीशां देवीमावाहयाम्यहम् ||
ॐ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् | यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ||
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ka aavahan karna chahiye-
Sarvlokasya Jananeem Sarvsaukhyapradaayineem |
Sarvdevmayeemeeshaam Deveemaavaahayaamyaham ||
Om Taam Ma Aavah Jaatavedo Lakshmeemanapagaamineem |
Yasyaam Hiranyam Vindeyam Gaamashvam Purushaanaham ||
Om Mahalakshmyai Namah | Mahalaksheemaavaahayaami, Aavahanaarthe Pushpaani Samarpayaami |
देवी लक्ष्मी जी के मंत्र को सेव कर पढ़े जब मन करे (Download Laxmi Mantra in PDF, JPG and HTML): आप इन मंत्रों को पीडीएफ में डाउनलोडजेपीजी रूप में या प्रिंट भी कर सकते हैं। इन मंत्रों को सेव करने के लिए ऊपर दिए गए बटन पर क्लिक करें।


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